तालिबान में विवाद: CIA के निर्देश पर UAE पहुंचे सिराजुद्दीन हक्कानी, dispute among taliban 2024

काबुल, 20 जून 2024 – अफगानिस्तान में taliban के भीतर संघर्ष की खबरें सामने आ रही हैं। तालिबान के प्रमुख नेताओं में से एक, सिराजुद्दीन हक्कानी, को कथित तौर पर CIA के इशारे पर यूएई ले जाया गया है, जिससे तालिबान के सुप्रीम लीडर मुल्ला हैबतुल्लाह अखुंदजादा भड़क उठे हैं। इस घटनाक्रम से तालिबान के भीतर सत्ता संघर्ष और विभाजन की आशंका बढ़ गई है।

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सिराजुद्दीन हक्कानी का UAE जाना

सूत्रों के अनुसार, सिराजुद्दीन हक्कानी, जो हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख और taliban के गृह मंत्री भी हैं, को पिछले हफ्ते गोपनीय तरीके से यूएई भेजा गया। हक्कानी का यूएई जाना CIA की पहल पर हुआ बताया जा रहा है, जिसमें कुछ गुप्त वार्ताओं और समझौतों की बात कही जा रही है। यह कदम तालिबान के अंदरूनी सर्कल में तनाव और असंतोष का कारण बना है।

मुल्ला हैबतुल्लाह की प्रतिक्रिया

मुल्ला हैबतुल्लाह अखुंदजादा, जो तालिबान के सर्वोच्च नेता हैं, ने इस घटनाक्रम पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि हक्कानी का यूएई जाना तालिबान की नीतियों और आदर्शों के खिलाफ है। मुल्ला हैबतुल्लाह ने इसे तालिबान की संप्रभुता और स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया है और इसके पीछे विदेशी साजिश का आरोप लगाया है।

TALIBAN में विभाजन की आशंका

इस घटनाक्रम से taliban के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। हक्कानी नेटवर्क, जो तालिबान का एक महत्वपूर्ण धड़ा है, और मुल्ला हैबतुल्लाह के समर्थकों के बीच तनाव बढ़ गया है। यह विभाजन तालिबान की शासन क्षमता और संगठनात्मक एकता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अफगानिस्तान के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद से तालिबान की स्थिरता पर असर पड़ सकता है और अफगानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने हक्कानी के यूएई जाने पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इसके पीछे की संभावनाओं को समझने की कोशिश की जा रही है। वहीं, यूएई सरकार ने भी इस मामले पर चुप्पी साध रखी है।

आगे की संभावनाएं

taliban के भीतर इस घमासान का अफगानिस्तान की स्थिरता और सुरक्षा पर क्या असर होगा, यह देखना अभी बाकी है। यदि यह विभाजन बढ़ता है, तो तालिबान की सत्ता पर पकड़ कमजोर हो सकती है और देश में एक नई अराजकता का दौर शुरू हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और क्षेत्रीय ताकतें इस स्थिति को कैसे संभालेंगी, यह भी आने वाले समय में स्पष्ट हो पाएगा।

कुल मिलाकर, तालिबान में सिराजुद्दीन हक्कानी का यूएई जाना और मुल्ला हैबतुल्लाह की प्रतिक्रिया ने अफगानिस्तान की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस घटनाक्रम का आगे क्या परिणाम होगा, यह समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल तालिबान के भीतर घमासान जारी है।

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